देसी गाँड फाड़, जवानी की चूत

केले तो हमारी भी बेकार हो रहे है। कोई खाने वाला नही है” मैंने कहा.“तुम मुझे अपना केला खिला दो और मैं तुम्हारा खा लुंगी” दया आंटी कहने लगी.मेरा चोदू भाई मीनू फिर से मेरी तरफ देखने लगा और हँसने लगा। उसके बाद हम दोनों सीढियों से उनके अपार्टमेन्ट में चले गये जो 2nd फ्लोर पर था। वो हम दोनों को सोफे पर बिठा दी और केले की ट्रे लाकर रख दी। अपने हाथ से छीलकर खिलाने लगी। 2 2 केले हम दोनों भाइयों ने खा लिए। वसुधरा आंटी आकर हमारे बीच में बैठ गयी। हम दोनों भाइयो की पेंट कर उपर से लंड को पकड़कर रगड़ने लगी।“अब तुम दोनों का केला मैं खाऊँगी” वो कहने लगी।मैं और मीनू दोनों बहुत खुश हो गये थे क्यूंकि काफी दिनों से हमने चुदाई का मजा नही लिया था। धीरे धीरे दया आंटी हमारी जींस की जिप खोल दी और हमारे लंड को बाहर निकाल दी और हाथ में लेकर मुठ देने लगी।मैं और मीनू “आआआअहह…..ऊऊऊऊओह…..ईईईईई…. माँआआ…” करने लगे। फिर वो और मुठ देती रही और हमारे केले बड़े बड़े होकर 7” के हो गये। वो चूसना चालु कर दी। 1 मिनट मेरा लंड चूसती, फिर मीनू का। इस तरह से बदल बदलकर चूस रही थी।“ओह्ह गॉड!!

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