अरे…. XXX Hindi ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.लेकिन बेचारो के हाथ मे 6 महीने से कोई भी उम्रदराज औरत हाथ न आई थी, आज उन दोनों के मन मे इस आंटी की चूची और गांड देखकर मन मे ख्याल आया कि शायद ये हाथ आ जाये, तभी पिछे वाला उसके नितम्बों में अपना खड़ा लिंग रगड़ते हुए बोला:आंटी, आह क्या मस्त चूतर हैं आपके, हाय बहुत अच्छा लग रहा है। ऐसा कहते हुए उसके हाथ अब उसकी कुर्ती को सामने से उठाकर उसकी सलवार के ऊपर से उसकी भारी हुई जाँघों पर आ गए।अब अंकिता का मन उसके बस में नही रहा और उसकी सिसकी निकल गयी और वो धीरे से बोली: कोई देख लेगा तो क्या होगा, प्लीज़ मुझे छोड़ दो। में आप लोगो के आगे हाथ जोड़ती हूँ, में ऐसी औरत नही हूँ, कृपया मुझे छोड़ दो आप लोग.सामने वाला लड़का उसकी छातियों को दबाते हुए बोला: इतनी भीड़ है आंटी, किसी को होश नहीं है, आप मज़ा लो।अब पिछेवाले लड़के ने उसके पेट को सहलाते हुए उसकी सलवार के ऊपर से उसकी जाँघों के जोड़ तक हाथ डाल दिया। अब अंकिता की पैंटी गीलीहोने लगी। काफ़ी दिनों से प्यासी तो थी ही, और अचानक उस लड़के ने उसकी चूत पर अपना हाथ रखा और वहाँ सहलाने लगा।अब वो धीरे से बोला: आंटी, प्लीज़ टाँगें फैलाओना।और










