ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.थोड़ी देर बाद, उसने बोला की उसका पानी निकल गया और वो खुश हो गई है.. XXXBF नीचे ग्राउंड फ्लोर पर, एक आगे वाला कमरा ऐसे ही खाली रहता था और अंदर के कमरे उन्होंने रेंट पर दिए हुए थे, एक परिवार को.. नीचे ग्राउंड फ्लोर पर, एक आगे वाला कमरा ऐसे ही खाली रहता था और अंदर के कमरे उन्होंने रेंट पर दिए हुए थे, एक परिवार को.. उसके चेहरा से फिर मैं उसके होंठों पर पहुँचा और उसके होंठ को चूमने लगा..बहुत ज़्यादा ही मज़ा आ रहा था, हम दोनों को.. उसके बाद नीचे झुक कर उसने मेरा लण्ड, अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे धीरे धीरे पूरा मुंह में लेकर चूसने लगी..यह एक ऐसा अनुभव था, जो मैं काफ़ी सालों से महसूस करना चाहता था.. अब मैं उसके नरम नरम बूब्स दबाने लगा, अपने हाथों से.. फिर भी मैंने अपना पूरा मन बना लिया था की आज में लण्ड को चूत के अंदर डाल के ही रहूँगा..दिव्या दीदी भी बहुत बेचैन हो रही थी और बोली – जल्दी डाल ना, अपना लण्ड मेरी चूत में… क्यूँ तडपा रहा है….















