२ दिन बाद जब हम दोनों का कॉलेज ३ बजे छूटा तो मैं उसको पास के पार्क में ले गया.एक पेड़ के पीछे नरम घास पर बैठ गए. धीरे धीरे वो मेरे लौड़े पर कूदने लगा. BFSex हम दोनों पर चुदास हावी थी.मैंने अपनी कलाई घड़ी पर नजर डाली साढ़े ३ बजे थे. वो भी मुँह चला चलाकर मेरे होंठ पीने लगा. मैंने निशा की बुर का खूब जीभरके भोग लगाया. निशा का मस्त मस्त छरहरा बदन मेरे सापने आ गया. मैंने उसका सूट निकाल दिया. आज तो मुझे स्वर्ग मिल गया था. अगर एक बार उसको और ले लूँ तो क्या हर्ज है. ये खेल बड़ी देर चला. वो मेरे उपर ही थी.कुछ देर बाद वो फिर से मेरे लौड़े पर सीधा बैठ गयी और नीचे से जोर जोर से उपर की ओर धक्के मारने लगा. मैं और निशा पीठ के बल लेटे हुए नही थी बल्कि हम दोनों पश्चिम की ओर करवट लिए हुए थे. उसके गालों में डिम्पल पड़ गए थे. मैं दिन के उजाले में उस पार्क में उसके गुप्तस्थलों को छूने लगा. भाई जिंदगी का मजा आ गया मुझे. सायद् वो शर्म कर रही थी.उसका मुँह लाल लाल हो गया था.















