स्कूल के बाद देसी मज़ा

मैं अभी नीचे आती हूँ.!”जैनब ने जल्दी से संजय का कमरा बंद किया और नीचे आकर दरवाजा खोला। नज़ीला उसके पड़ोस में रहती थी। उसकी उम्र चालीस साल थी और वो अपने घर में ही ब्यूटी पार्लर चलाती थी। वो दोपहर में कईं बार जैनब के घर आ जाया करती थी या उसे अपने यहाँ बुला लेती थी और दोनों इधर-उधर की बातें किया करती थी।उस दिन भी जैनब और नज़ीला ने गली मोहल्ले की ढेरों बातें की। नज़ीला के जाने के बाद वो फिर नहाने चली गयी। सुबह संजय ने साड़ी का ज़िक्र किया था इसलिये जैनब ने नहा कर फिरोज़ा नीले रंग की प्रिंटेड साड़ी पहन ली और साथ में सिल्वर रंग के हाई पेंसिल हील वाले खूबसुरत सैंडल भी पहने।संजय के आने का समय भी हो चला था। संजय आज पाँच बजे ही आ गया। जब जैनब ने दरवाजा खोला तो वो उसे बड़े गौर से देखने लगा। उसे यूँ अपनी तरफ़ ऐसे घूरता देख कर जैनब शरमाते हुए लेकिन अदा से बोली, “ऐसे क्या देख रहा है संजय!”तो वो मुस्कुराता हुआ बोला, “वॉव भाभी! XXX BF मैं शाम तक वापस आ जाऊँगा… और हाँ आज नादिया भाभीजान आने वाली हैं… उनकी अच्छे से मेहमान नवाज़ी करना!”ये कह कर इकरा और आबिद चले गये। जैनब ने मन ही मन में सोचा कि “अच्छा तो इसलिये आबिद इकरा को उसकी मामी के

स्कूल के बाद देसी मज़ा

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