जिसने फिर से अपना चेहरा मोड़कर ऊपर की और कर लिया था और अपनी आँखों पर फिर से बांह रख ली थी.दूसरी तरफ से : ……………………………………………………“मैं क्या करूंगी वही कर रही थी जो पूरा दिन करती हूँ, बस आपको याद कर रही थी”.दूसरी तरफ से : ……………………………………………………“नींद किसे आती है जान, यहाँ तो पूरी पूरी रात करवटें बदलते बदलते निकल जाती है, ना दिन को चैन, ना रात को, बस किसी तरह दिन काट रहे हैं आपकी राह देखते”.दूसरी तरफ से : ……………………………………………………“इतनी याद आती है तो फिर छोड़ कर क्यों गए थे…. XXX BF और इसीलिए मैंने उसे वहीँ रोक दिया था…. रिशु का लंड उसके नितम्बो की घाटी में से निकला तो बुरी तरह से झटके मार रहा था.“तुम तो कहते थे घर के काम में मेरी मदद करोगे, यह मदद करोगे, मुझे भी काम नहीं करने देते, जब देखो अपने इसको घुसा देते हो मेरी ….” प्रतिमा रिशु को डांटने के स्वर में बोलती है.“वो मम्मी….वो मम्मी” रिशु शर्मिंदा था और अपनी मम्मी की इस अचानक तबदीली से हतप्रभ भी.“इधर आओ …और यह सलाद काटो, सब्जी बन गई है, मैं रोटी पका लेती हूँ” प्रतिमा बेटे का उतरा हुआ चेहरा देखकर चह्कती है, “खाली पेट मेहनत नहीं की जाएगी….















