धीरे-धीरे मेरी मेहनत रंग लाने लगी और अब सौम्या अपनी कमर भी उचकाने लगी, मैंने अपने को रोका और सौम्या की तरफ देखते हुए बोला- तुम अपनी कमर को क्यों उचका रही हो?तो बड़ी ही साफगोई से बोली- मेरी बुर के अन्दर जहाँ-जहाँ खुजली हो रही है, तुम्हारे लंड से खुजलाने का मन कर रहा है। कितनी मीठी… यार ये बहुत ही मीठी-मीठी खुजली है, जितनी मिटाने की कोशिश कर रही हूँ, उतनी ही बढ़ती जा रही है।‘अपना दूध पिलाओगी?’‘अब मैं तुमको कुछ मना नहीं कर रही हूँ अब मैं तुम्हारी हूँ जो पीना हो, पी लो।’‘मजा आ रहा है?’‘बहुत मजा आ रहा है!’ सौम्या बोली- मैं चाहती हूँ कि तुम अपना लंड मेरी बुर के अन्दर डाले ही रहो।उसके इतना कहने के साथ ही मैं रूक गया और उसके छोटे-छोटे संतरेनुमा चूची को गोलगप्पा समझ कर मैं अपने मुंह के अन्दर भर लेता तो कभी उसके दाने पर अपनी जीभ चलाता या फिर उन दानों को बोतल में भरे हुए माजा के अन्तिम बूंद समझ कर चूसता।मुझे बहुत मजा आ रहा था कि सौम्या एक बार फिर बोली- अशोक, खुजली और बढ़ रही है।मैं समझ चुका था, अब उसे मेरे लंड के धक्के चाहिये थे, इसलिये मैं एक बार फिर पहली वाली पोजिशन में आया और अपने दोनों हाथों को एक बार फिर बिस्तर पर टिकाया और इस बार थोड़ा तेज















