वो जल्द से जल्द चुदवाना चाहती थी. मैं कुछ देर तक उसके पुष्ट नितम्बो को चूमता चाटता , सहलाता और उनसे खेलता रहा. XXXBF मैं खूब समझता था की उसका भी अंदर से चुदवाने का मन है.मैंने उसको दोनों कंधे से पकड़ लिया और पुचकार पुचकार कर किसी छोटे बच्चे की तरह उसके गाल पर मैंने पप्पियों की बरसात कर दी. क्यूंकि कुछ ही देर में मेरे धक्कों का वेग बढ़ गया था, पर ज्योति और उसकी चूत अपनी जगह कायम थी. जिस्म भी किसी हसीना से कम नही था. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.पर ज्योति तो प्यार से खाने वाली माल थी. वो आह हा हाहा आह अह करके सिसकारी भर रही थी. जिस्म भी किसी हसीना से कम नही था. आखिर मैंने ज्योति के भोसड़े में अपना बेशकीमती लौड़ा डाल दिया और उसको चोदने लगा. ‘ज्योति जी !! दिल में चाह उठी की जाऊ आशीष में कमरे में जाकर देखू की मेरी आवारा छिनाल बीबी रौशनी कैसे चुद रही है.फिर सोचा की उनकी प्राईवेसी में दखल देना सही नही होगा.















