इसलिए दोस्तों मैं बहुत डर रही थी.पर जब मैं एक बार ससुराल आई तो पता चला की मैं बेकार ही डर रही थी. चलिए कैंटीन में चल कर कर कुछ खा पी लिया जाए सूरज बोले मैं उनके साथ हो ली हम दोनों कैंटीन में चले गए वाहन कोई नहीं था सूरज ने चाय और समोशे का आर्डर दिया हम बात करने लगे सूरज मुझे अजीब नजरों ने देख रहे थे.ननदोई जी! BF XXX सारे आसनों से बारी बारी चुदाई करता हूँ उन्होंने लिख के भेजा. मैं हॉस्पिटल में पल्लवी के पास ही हमेशा रहती थी. २ दिन बाद मेरी नन्द पल्लवी को एक लड़की हुई. मैंने हस्ते हुए पूछ लिया.सलहज जी!! मुझमे और आपमें बहुत सी समानताये है. वो मेरे उपर आ गए. नन्दोई मुझको पटा पट पेले जा रहे थे. फिर कुछ महीनो बाद मेरी नन्द पल्लवी के बच्चा होने वाला था. पैसो को लेकर मेरा पति से झगडा ही हुआ था की वो क्यूँ अपना पैसा ननदों पर लुटाते है.सूरज मुझसे अब खुल गए थे और खूब बाते कर रहे थे.














