मेरा जिस्म और मेरी चूत भी तो वैसी ही है ना?”रोज़ा के चाटने से अनिल को अच्छा लगा। उसे अब पेशाब आ रहा था। एक बार पेशाब करके फिर रोज़ा से लंड चूसवाना उसने बेहतर समझा। अनिल ने रोज़ा को ये बताया पर रोज़ा उसकी आँखों में आँखें डाल कर देखती हुई उसका लटकता और तना लंड सहलाती रही, मानो वो कुछ कहना चाहती हो पर शर्म से कह नहीं पा रही हो।अनिल ने एक मिनट रोज़ा को देखा और फिर उसके दिल की बात समझ गया। अपना लंड रोज़ा के मुँह की तरफ करके पेशाब करने लगा। अनिल के पेशाब से रोज़ा का मुँह भर गया तो फिर उसकी पेशाब मुँह से हो कर मम्मों को गीला करते हुए और फिर नीचे चूत को गीली करके ज़मीन पे गिरने लगा।अपना लंड फिर रोज़ा की माँग पे निशना लगाकर उसमें पेशाब करते हुए अनिल बोला, “तेरी माँ की चूत हरामी राँड, आज तक किसी भी औरत की माँग ऐसे नहीं भरी थी, राँड तुझे पेशाब पिला कर और माँग भर के अब तुझे अपनी छिनाल बनाया है। रही बात गरम करने की तो क्या तूने आज तक अपने मर्द को भी तुझे इतना गरम करते देखा है?तू तो चुदवाने के पहले ही राँड बन गयी है। मादरचोद तेरी जैसे मुल्लनी औरत को मेरे जैसा लौड़ा जब मिलता है तो तुम लाज शरम















