शालिनी ज़मीन पे बैठ अपनी उखड़ी सांसो को संभालने लगी. नाचते नाचते दिव्या ने लाइट धीमी कर दी. BFSex मेरा लंड उसके गले तक घुस गया और तभी लंडने जोरों की पिचकारी उसके मुँह में छोड़ दी.हम चारों को अपनी साँसे संभालने मे थोडा वक़्त लगा. उसने अपने चूत के बाल एक दम शेव किए हुए थे, जो में हमेशा दिव्या से कहता था पर वो मेरी ये बात नही मानी. इतने मे शशांक ने मेरी तरफ मुस्कुरा के देखा. शशांक का भी काम होने वाला था उसने अपना लंड दिव्या की चूत से बाहर निकाल हिलाने लगा और फिर दिव्या के पेट और छाती पर अपने वीर्य की बरसात कर दी.शशांक अपना लंड फिर उसकी चूत में घुसा धक्के मारने लगा. काश शशांक ये सब देख पता कि कैसे मेरी दो उंगलियाँ उसकी बीवी की गांड मे अंदर बाहर हो रही थी.थोड़ी देर बाद जब उसकी गांड पूरी तरह से चिकनी हो गयी थी, “किशोर अब तुम मेरी गांड मार सकते हो, ये तुम्हारे लंड के लिए पूरी तरह से तय्यार है.” मेने उसे सीधा किया और अपनी गोद मे उठा उसे बिस्तर पे ले आया.















