ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.भाभी- लग गया झाडू अब घर के और काम……..अचानक उनकी नजर मेरे तंबू पर पडी वह चुप हो गई और साड़ी के उपर से ही अपने चूत को सहलाकर बाहर जाने लगी.मै – भाभी, सुनिए (और मै खडा हो गया जिस वजह से पूरे लंड की लंबाई पता चल रही थी).भाभी- क्या हुआ बाबू.मै- वो एक कप चाय मिलेगी बहुत थकान सी है.भाभी- हा तो ले लिजिए ना, मैने कब मना किया है.और हसकर बाहर चली गई, मै अपने कमरे मे ही बैठा विमला काकी और भाभी के बारे मे सोचकर लंड सहला रहा था फिर अचानक भाभी कमरे मे आई चाय लेकर.भाभी- बाबू आपकी चाय.(आवाज सुनकर मैने तुरंत ही लंड को छोड दिया.)मै – ह ह हाँ भाभी.मैने चाय ली और पीने लगा भाभी मुस्कुराते हुए बाहर चली गई. BFSex अजय ने आवाज दी.अजय – चाची कहा बाडू हो?चाची – हा बेटवा, आवा बैठा.(उनका पल्लू जमीन पर गिरा था उकडू बैठे होने की वजह से उनके घुटने से चूचिया दबकर फूल गए थे) मै यह देखने लगा अजय जाकर खटिया पर बैठ गया मै दूर खडे होकर चाची के चुचियो को देख रहा था। लंड खडा होने लगा अचानक चाची की आवाज सुनकर होश आया.चाची – अरे अनमोल बेटवा कैसे हो.मै- (हडबडाते हुए) ठीक हू चाची।चाची – बहुत दिन बाद गाव आए















