अपने बारे में कुछ बता दूं मैं बचपन में एक दुबला पतला, छरहरा, गोरा चिकना किशोर था मेरे गोरे चिकने छरहरे रूप को देख कर सभी यह कहते कि ग़लती से लडका बन गया, इसे तो लड़की होना चाहिए था!मुझे बाद में मौसी ने बताया कि मैं ऐसा प्यारा लगता था कि किसी को भी मुझे बाँहों में भर कर चूम लेने की इच्छा होती थी ख़ास कर औरतों को इसीलिए शायद मेरे रिश्ते की सब बड़ी औरतें मुझे देखकर ही बड़ी ममता से मुझे पास लेकर अक्सर प्यार से बाँहों में ले लेती थीं.मुझे तो इस की आदत हो गयी थी बाद में मौसी से यह भी पता चला कि सिर्फ़ ममता ही नहीं, कुछ वासना का भी उसमें पुट था और मैं सिर्फ़ औरतों को ही नहीं, कुछ मतवाले मर्दों को भी अच्छा लगता था! XXX BF बस ऐसा ही करता रहा, देख तुझे कितना रस पिलाती हूँ.”मौसी ने जल्द ही मुझे एक्स्पर्ट जैसा सीखा दिया मैंने मुँह से उसकी चुनमुनिया पर ऐसा करना किया कि वह पाँच मिनट में स्खलित हो गई और मेरे मुँह को अपनी चुनमुनिया के पानी से भर दिया चुनमुनिया का रस थोड़ा कसैला और खारा था पर बिल्कुल पिघले घी जैसा चिपचिपा.मैंने उसे पूरा मन लगाकर चाट लिया तब तक मौसी मेरे चेहरे को अपनी चुनमुनिया पर दबा कर हौले हौले धक्के मारती रही.















