भारतीय नर्स की पहली चुदाई

मैंने बेयरे को बार-बार चाय ड्रिंक वगैरह पूछने के लिए डाँटा और डिस्टर्ब नहीं करने की हिदायत दी। आसपास उपस्थित तीन-चार और लोगों से ध्यान मोड़कर मैं अपने मन के एकांत में डूब गया।रश्मि… सो गई होगी क्या? XXXBF मैं उसे जकड़े रहा, “मैं कुछ नहीं करूंगा। बस अंदर ही रहूंगा।”सचमुच ही मैंने कुछ नहीं किया। शांत पड़ा रहा। एक बार हिला तो फिर नहीं नहीं करने लगी। दो मिनट की फुर्सत देकर फिर सक्रिय हुआ। अब मैं उसकी ना-ना की अनसुनी करता उसे किसी जंगली घोड़ी की तरह साध रहा था। एक चरम सुख के बाद दूसरा, दूसरे के बाद तीसरा – उसे तुरत तुरत झड़ने की आदत डालनी होगी।उसकी योनि में इतना गीलापन बढ़ गया था कि फच-फच, चिट-चिट की आवाजें आ रही थीं। मैं ‘चिट-चिट’ को सुनने के लिए केवल पेड़ू से पेड़ू सटाने तक ही अंदर जाता और निकाल लेता। निकालने घुसने में आवाज होती ‘चिट’। केवल उसे गरदन तक ही अंदर डालना फिर निकाल लेना ‘चिट’ फिर जोर से ठोक देना- ‘फच!’“चिट-चिट, फच-फच… चिट-चिट, फच-फच… चिट-चिट… चिट-चिट… फच-फच… फच-फच-फच…” रश्मि से मिलन के वर्षों से ख्वाब देखते मन के लिए यह सर्वोत्कृष्ट क्षण था। योनि-स्वर्ग में आनन्द विहार। नारी जीवन को धन्य कर देने वाला संभोग। उसको धन्य करने में स्वयं भी धन्य होने का एहसास!प्यार नहीं, सेक्स अंधा होता है। मैं पागलों की तरह धक्के लगा रहा

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