बस बस चुद गयी तू !! मेरी नजरे अनूप भैया की नजरों से बंध गयी. XXX Hindi मई के इस मौसम में कूलर तो एक वरदान की तरह था. मेरी चूत का पानी तो मेरी बुर के बाहर बहने लगा. आह ! मैं दर्द से तडपती रही. और हम दोनों भाई बहनों का नाम ऍम बी बी एस में आ गया. एक तरह मुझे अच्छा लग रहा था क्यूंकि मैं जवान हो चुकी थी, चाहती थी की कोई मेरे गुलाबी होंठों की लाली चुराये. एक तरह मुझे अच्छा लग रहा था क्यूंकि मैं जवान हो चुकी थी, चाहती थी की कोई मेरे गुलाबी होंठों की लाली चुराये. जहाँ जहाँ भाई हाथ लगाते उत्तेजना और सनसनाहट होती. मैंने जरा भी वहां से पीछे नही हटी. बड़ी अजीब सी सनसनाहट मुझे महसूस हुई दोस्तों. मुझे सच में बहुत दर्द हो रहा था दोस्तों. बहुत दुःख रहा है. क्यूंकि मैं उनसे बहुत प्यार करती थी. मैंने भाई से कहा.भैया ने मुझे बाँहों में भर लिया. मैंने भी एक दो बार अनूप भैया को किस कर लिया. मेरी चूत तो बिलकुल गीली हो गयी. रात १२ बजे मेरी आँख खुली तो देखा अनूप भैया हाथ मेरे कन्धों पर था और उनकी दाई टांग मेरी टांग के उपर थी.















