बाकी कस्टमर से आप मुझे बहुत प्यार से चोद रहे है! हल्के हल्के प्यार से!!” गायत्री रंडी बोली.तो मैं बड़े प्यार से उसकी चूत के छेद को अपनी जीभ से पीने लगा। हम दोनों का बदन झनझना रहा था। ठीक इसी तरह मैं अपनी आवारा बीबी की चूत का छेद पीता था। फिर मैंने अपनी नुकीली जीभ गायत्री की चूत के अंदर तक डाल दी और उसे अपनी जीभ से चोदने लगा। कुछ देर बाद मैं गायत्री के चूत के दाने को सहलाने लगा और फिर मजे से चाटने लगा।“कौशल जी !! XXXBF जानेमन !!….तुम इस चुदाई वाले धंधे में कैसे आ गयी???” मैंने उसकी चुम्मी लेटे हुए पूछा.“मेरे पापा खतम हो गये थे। मेरी माँ अक्सर बीमार रहती थी। उनका इलाज हमेशा चला करता था। भाई बहनों की सब जिम्मेदारी मुझ पर ही आ गयी थी इसलिए मुझे इस चुदाई के धंधे में आना पड़ा!” गायत्री बोली.“….अब तो मैं अच्छा ख़ासा कमा लेती हूँ! मुझे अपने लंड पर बिठाकर चोदिये!! आप मत जाइये ! किसी गैर मर्द से क्यों चुदवाया तूने???’ मैंने अपनी बीबी से पूछा और उसके गाल पर मैंने १० २० चांटे जोर जोर से रसीद कर दिए।“चुदवाउंगी!!…..मैं उस लड़के से हजार बार चुदवाउंगी!!















