देवर जी !! आपसे चुदकर मेरा जीवन धन्य हो गया. XXX BF ये क्या जवानी में आप इतने धीरे धीरे धक्के मार रहे है. मैं तो सोच रहा था कहीं माँ चुदवाते चुदवाते मर मरा ना जाए. कहना गलत नही होगा की जिस तरह वो गर्म गर्म सासें अपने मुँह और नाक से निकाल रही थी उसको भी चुदवाने में बहुत मजा मिल रहा था. आज भी मेरी आँख १२, साढे १२ बजा के आसपास खुल गयी.मेरे बगल मेरी माँ जो हमेशा मेरे साथ सोती थी. वो चुदती रही. फिर भी वो नही रोई और दोनों टाँगे किसी कुतिया की तरह फैलाकर मजे से चुदवाती रही. जीतेन्द्र अंकल मेरी माँ के पीछे खड़े से.माँ को उन्होंने एक टेबल पर हल्का सा झुका रखा था. उससे इश्क लड़ाते रहे. मेरी भतीजी तो अब जवान हो गयी है. मेरे जीतेन्द्र अंकल अपने लौड़े में तेल लगाकर धार दे रहे थे. मैं अभी सौम्या को बुलाकर लाती हूँ. मैं सोच में पड गया की हाई अल्ला !! मेरी माँ बिलकुल नंगी थी. इस जालिम बुर को आज फाड़के रख दो!! मेरी भतीजी तो अब जवान हो गयी है. अपनी जवान लडकी सौम्या को चोदने को देंगी!…प्लीस भाभी सौम्या की बुर दिला दीजिये!!’ जीतेन्द्र अंकल माँ से गुजारिश करने लगी. वो नही थी. अब इसकी बुर के लिए बाहर से क्या लंड का इंतजाम करना आज ही इसे















