एक लड़की से लंड-चूत की बातें करने के लिए तो बहुत हिम्मत से काम लेना पड़ता है,और सही मौक़ा भी तो चाहिए।लेकिन एक बात तो तय थी, जब भी मेरा हाथ मेरी पैंट की जेब में होता तो उसकी नज़र मेरी पैंट की ज़िप पर और मेरी नज़र उसकी स्कर्ट के अंदर टटोली जा रही चूत पर जाती ही थी। इसके बाद हम आपस में चाहे कुछ भी बातें ना भी करें, मगर हम दोनों के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान तो रहती ही थी। मैं बस यही सोचता कि आखिर आगे कुछ बात कैसे और कब की जाए।मन ही मन यह सोच कर खुश हो लेता था कि उसके चेहरे की हल्की मुस्कान का मतलब भी यही था, कि उसके दिमाग में भी कुछ मेरे साथ मज़े लिए जा सकते हैं यह ज़रूर होगा। और वो भी सोचती होगी कि बड़ी होने के नाते पहल करे भी तो कैसे? “चल हट बदमाश! XXX Hindi मैं बोला “सिर्फ थोड़ी ताक-झाँक करके ही देखा है और वो भी सिर्फ एक को, लेकिन कई बार।”दीक्षा भी कोई सीधी-सादी बेवक़ूफ़ तो थी नहीं, तो बोली “समझ गयी, अपनी मम्मी और मेरी चाची को को झाँक कर देखते हो जब वो नहाते होते हैं। अव्वल किस्म के बदमाश हो तुम तो, एक्चुअली हम दोनों ही, क्योंकि ताक-झाँक करने के मौके तो मैं भी छोड़ती नहीं हूँ।आगे नहीं















