तू कितनी खुशकिस्मत है…. उनके सामने पैदा हुई ये फूलों की कलियाँ पूरी तरह से पक चुकी थी. XXX Hindi दरवाजे पर परदा कर दिया ताकि बाहर से कोई उन्हे देख ना सके..लालाजी की प्यासी नज़रों के सामने कामिनी के कबूतर फड़फड़ा रहे थे… उसकी आधे से ज्यादा गोलाइयाँ उनकी आँखों के सामने थी… लालाजी ने फ्रिज में से 2 कोला निकाल कर उन्हे पकड़ा दी… ठंडी-2 बोतल हाथ में आते ही दोनो ने उसे मुँह से लगा कर पीना शुरू कर दिया…बॉटल से 2 बूँद टपक कर उसकी क्लिवेज पर जाकर गिरी और गहरी घाटियों में गायब हो गयी… लालाजी ने बड़ी मुश्किल से अपने सूखे गले को तर किया… मन तो कर रहा था की उसकी गोलाईयों पर जीभ फिरा कर वो 2 बूँद भी वेस्ट होने से बचा ले… पर ऐसा करना मुमकिन नही था..लालाजी : “हाँ…अब बोल…क्या बात है…किसी चीज़ की ज़रूरत है क्या तुझे…?”कोला पीने के बाद कामिनी बोली : “हाँ लालाजी… और आपके सिवा हमारी मदद कोई और नही कर सकता…”लालाजी ने अपने कान उसकी तरफ लगा दिए और बोले : “हाँ हाँ बोल, क्या मदद चाहिए तुझे…”कामिनी : “लालाजी… वो… वो, हमें…. अंदर जाते ही लालजी ने अपना कुर्ता उतार दिया.. प्रेरणा की बहन शोभा आजकल अपने ससुराल से आई हुई थी, वो भी अपने बचपन की सहेली बिजली के घर गयी हुई थी…प्रेरणा : “कामिनी, एक















