देसी सौतेली माँ और ससुर का गुप्त मिलन

मेरा नाम इफ्तिखार है। मेरी उम्र इस वक़्त 27 साल है। मैं एक गोरा चिट्टा तंदरुस्त बांका जवान हूँ और इस वक़्त अपनी फैमिली के साथ मैं रावलपिंडी में रहता हूँ। आज जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, उस का आगाज़ पाकिस्तान के सूबे मुल्तान के शहर शुजाबाद सिटी के पास वाकीया एक छोटे से गाँव में हुआ। Paki Village Girlआज से चंद साल पहले ज़मींदारा कॉलेज शुजाबाद से ग्रेजुएट करने के बाद जब मुझे एक जानने वाले की मेहरबानी से लाहौर में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब मिली तो मैं अपने गाँव को खुदा हाफ़िज़ कह कर लाहौर चला आया और अपने दो दोस्तों के साथ एक फ्लैट में रहने लगा।मुझे लाहौर में जॉब शुरू किए अभी तक़रीबन 6 महीने ही हुए थे कि गाँव से आने वाली एक मनहूस खबर ने मेरे दिल को तोड़ दिया। खबर यह थी कि शुजाबाद शहर से अपने गाँव जाते हुए मेरे अब्बू के ट्रेक्टर का एक ट्रक से एक्सीडेंट हो गया है और इस एक्सीडेंट में मेरा 23 साला छोटा भाई समीम और मेरे 55 साला अब्बू चौधरी दोनो का इंतकाल हो गया था।यह खबर 50 साल से कुछ ऊपर मेरी अम्मी साजिया और मेरी 24 साला छोटी बहन तरन्नुम के लिए तो बुरी थी ही। मगर उन दोनों के साथ मेरे लिए ज्यादा बुरी इसलिए थी कि ना सिर्फ़ अब

देसी सौतेली माँ और ससुर का गुप्त मिलन

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