बच्चे बड़े हो गये, शादियाँ हो गईं लेकिन आप को तो बस एक ही चीज दिखाई देती है!’‘अब क्या करूं… तुम हो ही ऐसी प्यारी प्यारी!’ मैंने उसे मक्खन लगाया।‘सब समझती हूँ इस चापलूसी का मतलब!’ कहते हुए उसने मेरा हाथ अपनी जांघ पर से हटा दिया।‘अरे मान भी जा न। आज बहुत मूड बन रहा है मेरा, मेरा यह छोटू बेचैन है तेरी मुनिया से मिलने को!’‘कोई चान्स नहीं है, घर मेहमानों से भरा पड़ा है! बहूरानी मुझसे लिपटी हुई किसी अबोध बालिका की तरह मीठी नींद सोने लगी थी. BFSex मैंने तो पहली नज़र में ही तृप्ति को पसंद कर लिया था, अच्छे घर की पढ़ी लिखी कुलीन कन्या थी, उसे भला कौन नापसन्द कर सकता था. जब वो पहली बार मेरे सामने आई तो डरी हुई सी, घबराई हुई सी मेरे सामने सोफे पर बैठ गई थी, पत्नी मेरे साथ थी, उसने भी मुझे आँख के इशारे से कह दिया था कि उसे लड़की पसन्द है.फिर बेटे की शादी भी हो गई और तृप्ति मेरी बहू बन कर घर आ गई. मेरे झड़ते ही बहूरानी ने मुझे कस के पूरी ताकत से भींच लिया और अपनी टाँगें मेरी कमर में लॉक कर दीं.वो भी झड रही थी लगातार और उसका बदन धीरे धीरे कंप कंपा रहा था.














