उलटी हो जाओ, उसमें ज्यादा मज़ा आता है।”मुझे पता है ज्यादा मज़ा आता है, पर फिर भी एक डर था उसके अंग की लम्बाई मोटाई का, बहरहाल मैंने विरोध करने का मौका तो कहीं पीछे छोड़ दिया था। मैं घोड़ी बन गई। उसने मेरी कमर पर दबाव बना कर मुझे अपने हिसाब से नीचे कर लिया, अब मेरी योनि उसके सामने हवा में खुली थी, मगर वो उंगली मेरी गुदा द्वार पर फिरा रहा था।“वहाँ नहीं, प्लीज़, मैं मर जाऊँगी…”मैंने बेड पर लेट जाना चाहा मगर उसने मेरी कमर थाम ली थी।“नहीं, डरो मत मेरी जान, अभी इसका नंबर नहीं है।” वह हँसते हुए बोला।“शक्ल से तो बड़े शरीफ लगते हो, पर हो बड़े कमीने किस्म के इन्सान।”“एक इसी मामले में तो तो कोई साधू हो मौलाना, सब कमीने होते हैं और तुम जैसी शरीफ औरतें हम कमीनों को ही पसंद करती हैं।”सही कह रहा था कमीना ! XXXBF तुम अन्दर कैसे आये?” मुझे एकदम से तो गुस्सा आया पर साथ ही एक डर भी समा गया मन में।“कुछ नहीं मैडम, बस आपको नहाते हुए सामने से देखना चाहता था।”“दिमाग ख़राब हो गया है क्या? इस मंच पर मैं अपना नाम तो नहीं बता सकती, मिसेज रिज़वी कह सकते हैं। बाकी चीज़ें वैसी की वैसी लिख रही हूँ। मेरी उम्र पच्चीस साल है, सामान्य लम्बाई, रंग साफ़, फिगर भी साधारण, 34 नंबर की















