मेरे पास वापस आने के टिकेट था ट्रेन का, पर सासु माँ का टिकेट नहीं था. BFSex गोरी, स्टाइलिस्ट, साधना कट बाल. पर्दा लगा था.और सब लोग कम्बल तान कर सो गए थे, मैंने उनके साडी को ऊपर कर दिया, उन्होंने खुद ही पेंटी खोल दी. गोरी, स्टाइलिस्ट, साधना कट बाल. दोस्तों फिर उन्होंने कहा की आज के लिए इतना ही. गजब की पर्सनालिटी है. रषभरी की स्वाद है.और मेरी पहली सफलता हाथ लगी, ऐसा लगा की मुझे ओलिंपिक में मैडल मिल गया है. अब वो दो बड़ी बड़ी चूचियां मेरे सामने पड़ी थी. गजब की पर्सनालिटी है. मैंने ऊँगली में वो लसलसा लगा कर अपने मुह में ऊँगली डाली, ओह्ह्ह गजब का स्वाद था. फिर वो अपना साडी का आँचल निकली और मेरे गाल से लिपस्टिक साफ़ करने लगी.दोस्तों पहली बार मैं उनके बूब्स के बिच का भाग देखा. और ऊपर से गरम हो गया था हलके हल्का लसलसा पानी निकल रहा था. गजब का, सोने का चेन उनके बूब्स पे टिका था. मैंने कहा आपके होठ अभी भी लपलप लगता है. उसके बाद मैं उनके चूत में ऊँगली डालने की कोशिश की तो उन्होंने मेरे हाथ पकड़ लिया, बोला बेटा एक काम करते है.















