मैं कुछ अलग ही दुनिया में खोया हुआ था उस वक़्त… मैं किसके बारे में क्या बोल रहा था कुछ ख़याल नही था…. BFSex क्या किस्मत है सके की…भाभी: अच्छा सुन कल के लिए थेंक्स.. अब अचानक मेरा ध्यान टुटा… मुझे ख़याल आया के ये मैं क्या बोल गया… सब मुझे देख रहे थे… सब के मुह पर वासना के कीड़े थे… वहिषी बन चुके है… कुसूर मेरा है… मैं ही अपनी भाभी को सरेआम नंगा कर रहा हूँ…संजू: उहू… उहू… भाई… कहा हो आप? और क्या?भाभी: (वो लाल हो गई थी… क्योकि पहली बार आमने सामने बात हो रही थी) अरे बस बस… तो फिर मत करो न शादी भी? इस सिचुएशन में भाभी का सर मेरी और था, बाल्कनी की विंडो की तरफ था…भाभी इसी तरह मज़े ले रहे थे और अचानक से आँखे खोले मेरी और देखने का प्रयास किया… मैंने हाथ ऊपर करके होने का इशारा किया और मैंने का भी इशारा किया… भाभी होठो को दबाकर… हाथो से इशारा किया के मैं बाल्कनी में कुछ देखु… यहाँ पर अब मैं क्या देखु? ऐसा ही सब करते हो क्या? मेरा हथियार मुह में देकर मुह में ही झड़ना.६. आखिर उस मल्लिका का शहज़ाद ए मालिक वो अकेला ही तो है… पूर्ण स्त्री है वो…. तो वो जवानी का क्या फायदा… आपको आदत नहीं पड़ी लगती… भैया आप पर भारी















