बहुत ही ज़्यादा मस्त लग रही हो इस ब्रा में।मैं – तीन दिन पहले ही गौतमी के साथ बाजार गई थी। उसने ही खरिदवाया। पहनने में भी बढिया है।तभी पर्दा हिला। मैं ने झट कंबल को अपने उपर खींचा और तिवारी जी ने रुपया को भी कंबल के अंदर कर लिया। मैं मन ही मन मुस्कुराई। तिवारी जी ने ब्रा खोलने का भी एडवांस ले लिया था। मुझे विश्वास था कि ब्रा खोलने के बाद वे साड़ी उतारने बोलेंगे। फिर पेटीकोट उतरेगा और बाद में तिवारी जी अपनी ऑंखों के सामने घरवाली को दो-दो आदमियों से चुदवाते देखेंगे।मेरी क़िस्मत बढिया थी। वेटर ने मुझे माइक्रो ब्रा पहने नहीं देखा। ब्रा क्या था, सिर्फ़ चूचियों की घुंडी और उसके चारों तरफ़ मुश्किल से एक इंच घेरा को ही ढँक कर रखा था। चारों तरफ़ से मॉंसल चूचियों खुली थी। वेटर ने पहले सूप परोसा। तिवारी जी बाहर गये और उनके बाहर जाते ही।वरुण – रानी अब बर्दाश्त करना मुश्किल है।मैं – तो वेटर के सामने चोदोगे? BFSex जैसा खेल रहे हो खेलते रहो। तिवारी जी को जैसे ब्लाउज़ खोलने के लिए तैयार किया वैसे ही दूसरे काम के लिए भी तैयार करो। वो बोलेगा तो मैं सब कुछ करने को तैयार हूँ। उन्हें कम उम्र की माल बहुत पसंद है।मैं बोलना चाहती थी कि अपनी कमसीन बहन की जवानी की बात कर उन्हें उकसाओ















