विजय उसे देख के बिस्तर से उठा. डॉक्टर तो बहाना था, विजय तो उसे शॉपिंग ले के गया था, जैसे मैने माँ की बातों से सुना था. XXXBF हाँ ऐसे ही.”विजय, “अब सब बारी बारी से रिपीट कर, कभी सुपाड़े को चाट, कभी लंड को जीभ से सहला, कभी थूक के रगड़, कभी अपने होठों में लेके चूस और कभी आंडो के साथ खेल. विजय के लंड से थिक सीमेन का पहला शॉट माँ की आँखों पर पड़ा.विजय ने लोड़ा घुमा के सुपाड़ा माँ के माथे पे लगाया, जहाँ उसने लाल सिंदूर पहना था. माँ आगे बढ़ी और विजय से लिपट गयी. मैं सोच रहा था, कितना बड़ा होगा विजय का लोड़ा. विजय उसे देख के बिस्तर से उठा. कभी कभी महीने में एक दो बार वो लोग सेक्स करते, उसमें भी उनका सेक्स कभी 5-7 मिनिट से ज़्यादा नही चलता था. तभी अचानक विजय ने माँ को अपनी बाहों में भर लिया, और उसे चूमने की कोशिश करने लगा. तभी अचानक विजय ने माँ को अपनी बाहों में भर लिया, और उसे चूमने की कोशिश करने लगा. फिर विजय ने अपना लंड घुमा के माँ के लाल होठों पर लगाया और बाकी का सीमेन छोड़ दिया. उसने मूछें नहीं रखी थीं, पर वो लंबी दाढ़ी का मालिक था. क्या मस्त हो के किस कर रही थी मेरी माँ उस को..















