मैंने वैसे ही किया,वो नीचे झुकी और मेरे लण्ड को अपने हाथ में लेके दबाते हुए बोली- मोटा तो खूब है.मैं- सूज़न से हुआ है.वो- हां हां, वार्ना कहा इतनी मोटाई मिलती है देखने को.वो कभी धीरे से दबाती तो कभी सख्त और पूछती- दर्द होता है.मैं- ऐसे नहीं होता.वो- तो कब होता है .अब उसको मैं क्या बताता उत्तेजना की बात.वो- बता न कब होता है दर्द, अब न बतायेगा तो सूज़न कैसे जायेगी.मैं- जब उत्तेजना आती है.वो- उत्तेजना शाबाश लड़के शाबाश.मैंने नजर नीचे कर ली. अब नीलम ताऊ की जांघो पर आ गयी और लण्ड को अपनी चूत पे टिका के उसपे बैठने लगी.जैसे जैसे उसके चूतड़ नीचे आ रहे थे लण्ड चूत में गायब हो रहा था, और फिर मिश्री ने भी अपने लण्ड पर तेल चुपड़ा और उसे नीलम की गाँड़ पे सटा दिया और अगले पल जब मिश्री का लण्ड नीलम की गाँड़ में घुसा तो नीलम की आहे उस ख़ामोशी में गूंज उठी.जैसे डबल रोटी के दो टुकड़ों के बीच ढेर सारा मक्खन उसी तरह वो लग रही थी दो मर्दो के बीच नीचे से ताऊ और ऊपर से मिश्री नीलम को पेल रहे थे. BF XXX वो मुझसे कुछ आगे चल रही थी तो न चाहते हुए भी मेरे मन के चोर की नजरें उनके इठलाते हुए नितंबो पर ठहर ही गयी थी.उस लचक ने मेरे मन















