सुह्ह निकल जाती। दीपक सर मेरी चूंची को अच्छे से पी रहे थे। मेरी चूत में अब जोर जोर से खुजली हो रही थी। मै अपना हाथ जीन्स में डालकर चूत में उंगली कर रही थी।दीपक सर ने मेरी जीन्स से बेल्ट को खोलकर निकाल दिया। मेरी जीन्स का बटन खोलकर मेरी जीन्स निकाल कर मुझे पैंटी में कर दिया। मुझे पैंटी में देखकर दीपक सर बहुत ही उत्तेजित होकर जल्दी से अपना पैजामा निकाल कर फेंका। उनका लंड अंडरवेअर में तना खड़ा था। लग रहा था जैसे अंडरवेअर फाड़ के अभी बाहर कूद आएगा।दीपक सर का बड़ा मोटा लंड देखकर अंदर से मेरी चूत धुक धुक करने लगी। मुझे अपनी चूत की फिक्र होने लगी। दीपक सर मेरी पैंटी को निकाल कर सूंघने लगे। मेरी पैंटी को सूंघते ही दीपक सर का लंड अंडरवेअर में उछलने लगता। दीपक सर ने मेरी दोनों टांगो को खोलकर मेरी चूत के दर्शन किया।मेरी चूत को देखकर वो चाटने को टूट पड़े। जैसे बिस्किट को देखकर कुत्ते टूट पड़ते है। दीपक सर मेरी चूत को अपनी पूरी जीभ लगा कर चाट रहे थे। जैसे मेरी चूत पर चॉकलेट लगा हो। बड़े ही मजे ले ले कर मेरी चूत चूस चाट रहे थे। मै गरम गरम साँसे छोड़ रही थी। मै दीपक सर को अपने चूत में दबा रही थी।मेरी दबाते ही दीपक सर मेरी चूत















