मैने भी उतर दिया ऐसे कैसे, कोई अपनी जान को मरता है क्या? XXXBF गति को मै लगातार बढ़ा रहा था और चुत की गहराई को जैसे भेदे जा रहा था. मैने कहा अब तो है ही (आधे ही सही). मैने फिर से जगह बदली और उसके एक टाँग को अपने एक हाथ पे उठा कर दुगनी रफ़्तार से चोदने लगा.मै चाहता था की जिस चरमसुख की हर्षिता को तलाश है उसमे हम दोनो एक साथ स्खलित हो. साथ मे मै अपनी उंगलिओ को उसकी रसीली चुत के फाको को सहला रहा था. दोनो ठक कर चूर हो चुके थे पर ऐसा लग रहा था की अभी भी प्यास अधूरी है.हर्षिता उठी और बाथरूम मे जाकर खुद को साफ किया और नग्न ही आकर मेरे बाहों मे लेट गयी. वो दिन दुनिया से बेख़बर सी मंत्रमुग्ध होकर इस कदर मेरा लॅंड चूस रही थी की कुछ पल को लगा जैसे मै अभी ही झड़ जाऊंगा.मैने स्वयं को संभाला हरषु को एक पल को रोका और 69 की पोसिशन ले लिया. होठों की कसावट और जीभ की गर्माहट मुझे आनंद के दूसरे छोर पर लिए जा रहा था.















