अब वह मेरे ऊपर चढ़ने को बेताब हो रहा था… मैंने हलके से उसके कान में कहा ओ धीरज मेरे जिस्म को अपने बाँहों में भर लो.. और फिर परिवार भी इतना बड़ा था. XXXBF देखती. जब लिंग मेरी योनि द्वार से टकराया तो मैं सिहर उठी… ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरे योनि पर कोई पत्थर रख दिया हो… एक झटके में ही उसने आधा लिंग अंदर डाल दिया.. छीन ले मेरी आबरू… कर दे मेरी योनि को घायल.. उसने मेरी साड़ी को उठा पेंटी को नोच डाला..उसका हर सितम कितना सुहाना लग रहा था.. मैंने अपने आपको और स्थिर कर दिया ताकि उसे लगे की मैं सो रही हूँ.अचानक उसका हाथ मेरे जांघो पर आ गया मेरी तो सांस ही रुक गयी धीरे धीरे वो मेरे जांघो को मसलने लगा. एक पल के लिए तो ऐसा लगा जैसे वासना की आग मेरे नितम्बों से होती हुई मेरे जिस्म में फेल रही है… धीरज के हाथ मेरे जांघ के नर्म मांस को नोच रहे थे… ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पढ़ रहे है.मैं धीरे धीरे फिसल रही थी मैंने हलके से अपने कूल्हों का उचका कर उसके लिंग को हल्का झटका मारा.















