जी करता है काट कर खा जाऊं” निखिल बोला.तभी दूसरे किनारे सिर्फ अंडरवियर में ही अनुभव भी आकर बैठ गया। दोनों ने मिल कर एक फूल दो माली की तरह हाल बना दिया। दोनों का प्यार करना मेरे पर भारी पड़ रहा था। मै अपने आप को रोक नहीं पा रही थी। प्यार की प्रवाह धारा में मै भी खो गयी। वो दोनों आपस में बात करके कहा रहे थे।“यार पहली बार इतनी खूबसूरत माल को हाथ लगा रहा हूँ!! XXXBF तुम मर्दो की तो बस ये पुरानी आदत होती है औरतों की तारीफे करना” मैंने कहा.तभी निखिल ने गाड़ी रोकी और बाहर निकलने लगे। दोनों पास में ही खड़े होकर अपना अपना औजार निकाल कर पेशाब करने लगे। मेरी तरफ उन दोनों का पिछवाड़ा था। मेरे को उनके लंड का दर्शन ही नहीं करने को मिल पा रहा था।दोनो आपस में पता नहीं क्या बात कर रहे थे। दोनों ने अपना लंड अंदर किया और गाडी में आकर बैठ गए। अब ड्राइविंग अनुभव कर रहा था। निखिल आगे बैठने के बजाय पीछे की शीट पर मेरे बगल में आ गया।“यार सुरभि तुम अकेले ही बैठी ही अच्छा नहीं लग रहा था। बात करने में कोई तकलीफ ना ही इसीलिए मैं पीछे ही आ गया” निखिल ने कहा.इतना कहकर उसने मेरा हाथ पकड़ा। मैंने भी कोई विरोध नहीं किया।“क्या बात है तुम्हारे तो विचार कुछ बदलते हुए नजर आ रहे है” मैंने कहा.“तेरे को















