उसे भी कंप्यूटर के लिए कॉलेज के लैब में घंटो प्रतीक्षा नहीं करना पड़ता था. XXX BF फिर हम दोनों सपनों की दुनिया में खो गए. इसलिए मुझे चुदाई से कोई डर नहीं था. जाते जाते मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ऋषभ, क्योंकि बाथरूम बैडरूम के अंदर हैं इसलिए मैं दरवाजा खुला ही छोड़ देती हूँ.” थोड़ी ही देर में फिर से बादलों का गरजना फिर शुरू हुआ, मैं तुरंत बाहर आयी और ऋषभ को नींद से जगाया.“तुम अंदर आ जाओ मुझे बहुत डर लग रहा हैं. अब उसे हॉस्टल और खाने पीने का कोई भी खर्चा नहीं उठाना पड़ेगा. मेरे जैसी सुन्दर लड़की का साथ जैसे माने बोनस था.मुझे पढ़ाते पढ़ाते उसकी भी फिर से पढ़ाई (रिवीजन) हो जाती थी. रोज रात में कम से काम तीन -चार बार चोद चोद कर तुझे पूरा खुश कर दूंगा मेरी रानी. मेरी योनि का सील दो साल पहले ही साइकिल चलाते समय फट गया था. थोड़ा दिखाना और थोड़ा छुपाना, यही तो लड़कियों का सबसे बड़ा अस्त्र होता हैं!दो तीन महीनों के बाद एक दिन मैंने देखा की ऋषभ का चेहरा किसी समस्या में उलझा हुआ हैं. करीब पंद्रह मिनट के बाद जब उसका पानी छूटने वाला था तब उसने पूंछा, “कहाँ निकालू मेरा पानी?”मैंने कहा, “अंदर ही छोड़ दे गर्मागर्म पानी.















